मांगलिक दोष और विवाह अनुकूलता का सच
क्या मांगलिक दोष सचमुच डरने वाली बात है? शास्त्रीय अपवाद (भंग), दोष निवारण के कारक और यह जानें कि कई मांगलिक कुंडलियों में भी सुखी विवाह क्यों होते हैं।
जब लग्न से (और कुछ परंपराओं में चंद्र या शुक्र से) पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल हो, तो कुंडली मांगलिक कहलाती है। चूँकि इसमें आधे भाव आ जाते हैं, इसलिए बहुत से लोग किसी न किसी मात्रा में मांगलिक होते हैं।
आम दोष भंग
- दोनों साथी मांगलिक हों।
- मंगल स्वराशि में या उच्च का हो।
- मंगल या सप्तम भाव पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो।
- शास्त्रीय ग्रंथों में बताई गई विशेष राशि स्थितियाँ।
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अष्टकूट गुण मिलान, सप्तम भाव और उसके स्वामी की स्थिति, शुक्र और नवांश (D9) कुंडली — ये सब किसी एक लेबल से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। संतुलित रीडिंग डर से बचती है और समझ पर ध्यान देती है।
ज्योतिष पारंपरिक मार्गदर्शन और दृष्टिकोण देता है। यह पेशेवर चिकित्सकीय, क़ानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।
लेखक
ज्योतिषी अमित रॉय
वैदिक ज्योतिषी जो कुंडली, ग्रह दशा, रत्न और उपायों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन देते हैं।
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